सरकार ने गैर-अनुसूचित कैंसर रोधी दवाओं पर ट्रेड मार्जिन को अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) के 30% तक सीमित करने की मंजूरी दी है। इस फैसले का उद्देश्य कैंसर की दवाओं को अधिक किफायती बनाना और मरीजों व उनके परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करना है। दवाओं की सप्लाई चेन में जुड़ने वाले मार्जिन को सीमित करके इलाज की लागत कम करने की दिशा में यह कदम उठाया गया है।
किन दवाओं पर लागू होगा यह नियम?
यह नीति कई श्रेणियों की गैर-अनुसूचित कैंसर रोधी दवाओं पर लागू होगी। इनमें ब्रांडेड और जेनेरिक दवाएं, भारत में निर्मित और विदेशों से आयात की जाने वाली दवाएं, साथ ही पेटेंट वाली और बिना पेटेंट वाली दवाएं शामिल हैं।
नई नीति के दायरे में आने वाली दवाओं की सूची एक विशेषज्ञ समिति अंतिम रूप से तय करेगी। इसके अलावा, दवाओं की आपूर्ति लगातार बनी रहे, यह सुनिश्चित करने के लिए निर्माताओं को इन दवाओं का मौजूदा उत्पादन स्तर बनाए रखना होगा।
2019 के फैसले से मरीजों को मिली थी बड़ी राहत
कैंसर की दवाओं की कीमतों को कम करने के लिए सरकार पहले भी कदम उठा चुकी है। फरवरी 2019 में सरकार के निर्देश पर राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने औषधि (मूल्य नियंत्रण) आदेश, 2013 के पैराग्राफ 19 के तहत 42 चुनिंदा गैर-अनुसूचित कैंसर रोधी दवाओं पर ट्रेड मार्जिन सीमित किया था।
इस फैसले के बाद संबंधित दवाओं के अधिकतम खुदरा मूल्यों (MRP) में 91% तक की कमी दर्ज की गई थी। इसके परिणामस्वरूप 526 ब्रांडों पर सालाना ₹984 करोड़ की बचत होने की सूचना दी गई थी। इससे कैंसर मरीजों को दवाओं के खर्च में राहत मिली थी।
2019 के इस अनुभव के आधार पर सरकार ने अब ट्रेड मार्जिन की सीमा को व्यापक स्तर पर लागू करने की मंजूरी दी है। नई पहल का उद्देश्य दवाओं की सप्लाई चेन में सामने आई मूल्य संबंधी समस्याओं को भी दूर करना है। इस फैसले से सालाना ₹2,500 करोड़ की बचत होने का अनुमान है, जिससे कैंसर का इलाज करा रहे मरीजों को अतिरिक्त आर्थिक राहत मिल सकती है।
नए फैसले से मरीजों को क्या फायदा होगा?
गैर-अनुसूचित कैंसर रोधी दवाओं पर ट्रेड मार्जिन को MRP के 30% तक सीमित करने से अत्यधिक मार्जिन पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। हालांकि, नीति के तहत आने वाली दवाओं की अंतिम सूची विशेषज्ञ समिति तय करेगी। वहीं, निर्माताओं को इन दवाओं का मौजूदा उत्पादन स्तर बनाए रखना होगा।
सरकार के इस कदम का उद्देश्य कैंसर की दवाओं को अधिक किफायती बनाना और मरीजों व उनके परिवारों पर इलाज के खर्च का बोझ कम करना है।
