संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने 1 अक्टूबर 2026 को अपने 100 साल पूरे किए, जो 1926 में लोक सेवा आयोग की स्थापना के बाद इसकी एक सदी लंबी यात्रा को दर्शाता है। पिछले 100 वर्षों में UPSC एक संवैधानिक संस्था के रूप में विकसित हुआ है और भारत की सार्वजनिक सेवाओं के लिए भर्ती प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
लंदन में होने वाली ICS परीक्षा से संवैधानिक संस्था तक
भारत की सिविल सेवा व्यवस्था की जड़ें ब्रिटिश काल से जुड़ी हैं, जब Indian Civil Service (ICS) की परीक्षा लंदन में आयोजित की जाती थी। भारतीय अभ्यर्थियों के लिए इस परीक्षा में शामिल होने का मतलब इंग्लैंड की यात्रा करना था। परीक्षा अंग्रेजी में होती थी और इसमें ग्रीक तथा लैटिन जैसे विषय भी शामिल थे, जिससे भारतीयों के लिए उच्च सिविल सेवाओं में प्रवेश करना कठिन था।
1862 में 21 वर्षीय सत्येंद्रनाथ टैगोर कलकत्ता से इंग्लैंड गए। उन्होंने 1863 में ICS परीक्षा पास की और 1864 में सेवा में शामिल हुए। वह प्रतिस्पर्धी परीक्षा के माध्यम से ICS में शामिल होने वाले पहले भारतीय बने। इसके बाद सुरेंद्रनाथ बनर्जी, बिहारी लाल गुप्ता और रोमेश चंद्र दत्त सहित अन्य भारतीयों ने भी इस परीक्षा में सफलता हासिल की।
कई दशकों तक ICS में भारतीयों की संख्या सीमित रही। 1919 तक 1,255 ICS अधिकारियों में केवल 78 भारतीय थे। एक महत्वपूर्ण बदलाव 1922 में आया, जब पहली बार ICS परीक्षा भारत में इलाहाबाद में आयोजित की गई, जबकि परीक्षा लंदन में भी जारी रही। बाद में 1928 में परीक्षा केंद्र को दिल्ली स्थानांतरित कर दिया गया।
1 अक्टूबर 1926 को भारत में पहला Public Service Commission स्थापित किया गया। शुरुआत में यह एक सलाहकार संस्था के रूप में कार्य करता था, लेकिन स्वतंत्रता के बाद इसकी भूमिका विकसित हुई। 1950 में संविधान लागू होने के साथ यह Union Public Service Commission (UPSC) बना और स्वतंत्र भारत की प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा बन गया।
संविधान में UPSC के लिए क्या प्रावधान है?
लोक सेवा आयोगों से संबंधित संवैधानिक प्रावधान भारतीय संविधान के भाग XIV, अध्याय II में अनुच्छेद 315 से 323 तक दिए गए हैं।
अनुच्छेद 315 संघ और प्रत्येक राज्य के लिए लोक सेवा आयोग की व्यवस्था करता है और UPSC को संवैधानिक आधार प्रदान करता है। वहीं अनुच्छेद 320 लोक सेवा आयोगों के प्रमुख कार्यों से संबंधित है, जिसमें संघ और राज्य सेवाओं में नियुक्तियों के लिए परीक्षाएं आयोजित करना तथा भर्ती से जुड़े विभिन्न मामलों में सलाह देना शामिल है।
इस प्रकार, उस दौर से जब भारतीय अभ्यर्थियों को ICS परीक्षा देने के लिए लंदन जाना पड़ता था, आज की संवैधानिक संस्था तक UPSC की यात्रा भारत की सार्वजनिक सेवा भर्ती व्यवस्था में एक सदी के बदलाव को दर्शाती है।
