ऋषिकेश – कर्णप्रयाग रेल परियोजना से उत्तराखंड के देवभूमि क्षेत्र में रेल कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है। इससे प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान होगी और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। रेल मंत्रालय के अनुसार, इस परियोजना का उद्देश्य क्षेत्र में परिवहन सुविधाओं को मजबूत करने के साथ-साथ सतत विकास को प्रोत्साहित करना है।
125 किलोमीटर लंबी रेल लाइन, 5 जिलों में होंगे 12 स्टेशन
यह रेल परियोजना 125 किलोमीटर लंबी है और इसमें पांच जिलों में 12 स्टेशन शामिल हैं। परियोजना के तहत सुरंग निर्माण में भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 16 मुख्य सुरंगों में से 13 और 12 एस्केप सुरंगों में से 10 का ब्रेकथ्रू हासिल किया जा चुका है।
पर्यावरण के अनुकूल रेल विकास पर जोर
परियोजना में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े उपाय भी शामिल हैं। इनमें रेल मार्ग के किनारे मधुमक्खियों के लिए फूलों वाले कॉरिडोर विकसित करने की योजना और ट्रैक के आसपास हरियाली के लिए उपचारित पानी का दोबारा उपयोग करना शामिल है। इन पहलों का उद्देश्य हिमालयी क्षेत्र में हरित और टिकाऊ रेल नेटवर्क को बढ़ावा देना है।
परियोजना के चालू होने के बाद उत्तराखंड के धार्मिक स्थलों की यात्रा करने वाले यात्रियों को सुविधा मिलने की उम्मीद है। इससे क्षेत्र में पर्यटन और परिवहन व्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है।
